साईं स्तुति

 

साईं स्तुति


जो शिरडी में आएगा, आपद दूर भगाएगा ।


चढ़े समाधि की सीढ़ी पर, पैर तले दुख की पीढ़ी पर ।


त्याग शरीर चला जाऊंगा, भक्त हेतु दौड़ा आऊंगा ।


मन में रखना दृढ़ विश्वास, करे समाधि पूरी आस ।


मेरी शरण आ खाली जाए, हो तो कोई मुझे बताए ।


जैसा भाव रहा जिस जन का, वैसा रूप हुआ मेरे मन का ।


भार तुम्हारा मुझ पर होगा, वचन न मेरा झूठा होगा ।


आ सहायता लो भरपूर, जो मांगा वो नहीं है दूर ।


मुझमें लीन वचन मन काया, उसका ऋण न कभी चुकाया ।


धन्य धन्य व भक्त अनन्य, मेरी शरण तज जिसे न अन्य ।


।। इति श्री साईं स्तुति सम्पूर्णम् ।।