मंगला गौरी स्तुति

 

मंगला गौरी स्तुति


जय जय गिरिराज किसोरी ।
जय महेस मुख चंद चकोरी ॥ १ ॥


जय गजबदन षडानन माता ।
जगत जननि दामिनी दुति गाता ॥ २ ॥


देवी पूजि पद कमल तुम्हारे ।
सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे ॥ ३ ॥


मोर मनोरथ जानहु नीकें ।
बसहु सदा उर पुर सबही के ॥ ४ ॥


कीन्हेऊं प्रगट न कारन तेहिं ।
अस कहि चरन गहे बैदेहीं ॥ ५ ॥


बिनय प्रेम बस भई भवानी ।
खसी माल मुरति मुसुकानि ॥ ६ ॥


सादर सियं प्रसादु सर धरेऊ ।
बोली गौरी हरषु हियं भरेऊ ॥ ७ ॥


सुनु सिय सत्य असीस हमारी ।
पूजिहि मन कामना तुम्हारी ॥ ८ ॥


नारद बचन सदा सूचि साचा ।
सो बरु मिलिहि जाहिं मनु राचा ॥ ९ ॥


मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सांवरो ।
करुना निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो ॥ १० ॥


एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हियं हरषीं अली ।
तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चली ॥ ११ ॥


॥ इति मंगला गौरी स्तुति सम्पूर्णम् ॥